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UNSC: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हुई इमरजेंसी बैठक में भारत को रोकने की कोशि‍श में चीन-पाकिस्तान विफल

UNSC: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हुई इमरजेंसी बैठक में भारत को रोकने की कोशि‍श में चीन-पाकिस्तान विफल

संयुक्त राष्ट्र: भारत और पाकिस्तान के सवाल पर शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बंद कमरे में अनौपचारिक बैठक हुई। बैठक में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने और इससे जुड़े अन्य मसलों पर सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य देशों और दस अस्थायी देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

चीन की मांग पर बुलाई गई इस आपात बैठक में दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव पर चिंता जताई गई और संयम बरतने की अपील की गई। पाकिस्तान की मंशा के अनुसार जम्मू-कश्मीर मसले को तूल नहीं दिया जा सका।

पाकिस्तान के बैठक में भाग लेने के अनुरोध को पहले ही खारिज कर दिया गया था। बैठक के सूचना पत्र में इसके अनौपचारिक होने का स्पष्ट उल्लेख था। सुरक्षा परिषद की अनौपचारिक बैठक में विषय पर सामान्य चर्चा होती है और इनमें सदस्य देश विचार रखने से ज्यादा ताजा जमीनी हालात के जानकारी लेते हैं। इसमें न कोई संकल्प लिया जा सकता है और न ही मतदान होता है।

बैठक में किसने क्या कहा, यह भी सार्वजनिक नहीं किया जाता। सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य चीन की मांग पर आयोजित यह बैठक भारतीय समयानुसार शाम साढ़े सात बजे शुरू हुई। इससे पहले पांच अगस्त को भारत द्वारा अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद पाकिस्तान ने कड़ा एतराज जताया था।

वहां के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्ष जोआना रोनेस्का को पत्र लिखकर तत्काल बैठक बुलाने की मांग की थी। लेकिन पाकिस्तान की मांग अनसुनी कर दी गई।

इसके बाद पाकिस्तान के खास सहयोगी चीन ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने की मांग की। इसी के बाद यह अनौपचारिक बैठक आहूत हुई।

बैठक में शामिल होने के लिए पहुंचे रूस के उप स्थायी प्रतिनिधि दिमित्री पोलयांस्की ने स्पष्ट कहा, जम्मू-कश्मीर भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मसला है। बैठक केवल इसलिए आयोजित हुई है कि सदस्य समझ लें कि भारत में नया क्या हुआ है।

बैठक में अनौपचारिक विचार-विमर्श होगा। जम्मू-कश्मीर पर रूस की नीति बिल्कुल स्पष्ट है। यह मसला भारत और पाकिस्तान को ही निपटाना है। रूस अपनी नीति में कोई बदलाव नहीं करने जा रहा।

यह हमारा अंदरूनी मामला : भारत

भारत इस मामले में साफ कर चुका है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना और उसे केंद्रशासित प्रदेश बनाना देश का अंदरूनी मामला है। इसमें किसी अन्य देश को दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। पाकिस्तान इस सच्चाई को स्वीकार करे। जम्मू-कश्मीर मसले पर अगर कोई वार्ता होगी तो पाकिस्तान से द्विपक्षीय आधार पर होगी। यह भारत की स्थायी और घोषित नीति है।

शिमला समझौते के तहत निपटाएं मसला : महासचिव

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतेरस भी साफ कर चुके हैं कि जम्मू-कश्मीर का मसला भारत और पाकिस्तान को शिमला समझौते के तहत द्विपक्षीय आधार पर निपटाना है। उन्होंने दोनों देशों के मध्य नियंत्रण रेखा पर बढ़ रहे तनाव पर चिंता जताते हुए दोनों देशों से अधिकतम संयम बरतने का अनुरोध किया है।

भारत का दो टूक- हमें पता है लोकतंत्र और मानवाधिकारों की रक्षा कैसे करनी है

इस मामले में संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधि अकबरुद्दीन ने कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाना भारत का आंतरिक मुद्दा है और जम्मू-कश्मीर के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि बाहर के लोगों को इस फैसले से कोई मतलब नहीं है।

हिंसा किसी भी समस्या का हल नहीं है। पाकिस्तान की नाम लिए वगैर उन्होंने कहा कि एक देश जेहाद और हिंसा की बात कर रहा है जबकि हिंसा से कोई हल नहीं निकल सकता है। अकबरुद्दीन ने पहले पाकिस्तान के पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया।

उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की बातचीत से पहले पाकिस्तान को आतंकवाद पर रोक लगाना चाहिए। बीते 10 दिनों में कश्मीर में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। हमने कोशिश की कि कश्मीर के लोगों को दिक्कत न हो।

अकबरुद्दीन ने कहा कि भारत लोकतांत्रिक तरीके से जम्मू-कश्मीर के हालात को ठीक करने की कोशिश कर रहा है। किसी भी अंतरराष्ट्रीय संस्था ने नहीं कहा कि भारत मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है।

हमारा संविधान एक खुली किताब है। लोकतंत्र के बारे में हमारा अनुभव कई देशों से ज्यादा है। यूएन में भारत के स्थाई दूत अकबरुद्दीन ने चीन को भी आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि हमें पता है लोकतंत्र और मानवाधिकारों की रक्षा कैसे करनी है।

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