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हांगकांग में हालात लगातार गंभीर: चीन जिस तरह से आक्रामक देख, कहीं फिर थियानमेन स्‍क्‍वायर की कहानी तो नहीं दोहराई जाएगी

हांगकांग में हालात लगातार गंभीर: चीन जिस तरह से आक्रामक देख, कहीं फिर थियानमेन स्‍क्‍वायर की कहानी तो नहीं दोहराई जाएगी

नई दिल्‍ली: जम्‍मू कश्‍मीर के मसले को हवा देने वाला चीन हांगकांग की आवाज को दबाने के लिए क्‍या कर रहा है इसको पूरी दुनिया देख रही है। एक तरफ जहां वह जम्‍मू कश्‍मीर पर भारत सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा है वहीं दूसरी तरफ पूरी दुनिया हांगकांग के मुद्दे पर उसको ही सवालों के कटघरे में खड़ा कर रही है।

हालांकि आपको बता दें कि हांगकांग पहला नहीं है जिसकी आवाज को चीन दल-बल से दबाने की कवायद कर रहा हो। इससे पहले उइगर मुस्लिमों की आवाज को दबाने के लिए भी वह इसी तरह की कारवाई करता रहा है। उइगरों को जेल में डालने से लेकर, मस्जिदों को तोड़ना, आतंकी बताकर उनकी हत्‍या करवाना और उनके विशेष पहचान यह सभी वो कार्रवाई हैं जो चीन ने अब तक उइगरों के खिलाफ की हैं।

इसकी अगली कड़ी हांगकांग भी बन सकता है। दरअसल, पूरी दुनिया हांगकांग की खराब होती स्थिति से तो चिंतित है ही लेकिन वह इस बात से भी चिंतित है कि कहीं हांगकांग में भी थियानमेन नरसंहार कांड की तर्ज पर चीन कार्रवाई न कर बैठे। इसको लेकर कई देशों ने अपनी आशंका भी व्‍यक्‍त की है।

इस आशंका के पीछे जो वजह है वह भी इस ओर इशारा कर रही है। दरअसल, चीन ने हांगकांग की सीमा पर काफी संख्‍या में जवानों की तैनाती की है। इसके अलावा हांगकांग में ही प्रदर्शनकारियों की आवाज को दबाने के लिए सुरक्षाबलों की सख्‍ती बढ़ती जा रही है।

हांगकांग के प्रदर्शनकारियों की बात करें तो पिछले सप्‍ताह उन्‍होंने हार्बर पर लगे चीन के राष्‍ट्रीय झंडे तक को नुकसान पहुंचाया था, जिसके बाद वहां पर सुरक्षाबल तैनात किए गए थे। यहां पर कई बार प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तीखी झड़पें भी हो चुकी हैं।

खराब होते हालातों के मद्देनजर यहां की उड़ानें भी बुरी तरह से प्रभावित हुई है। इतना ही नहीं हवाई अड्डे तक को बंद तक कर देना पड़ा है। आपको बता दें कि 1997 में ब्रिटिश और चीन के बीच हुए समझौते के मुताबिक काम कर रहे हांगकांग में न्‍यायालय चीन से अलग स्‍वतंत्र रूप से काम करता है। इसके अलावा अभिव्‍यक्ति की आजादी भी है, जिसे चीन लगातार दबाने की कोशिश कर रहा है।

हांगकांग में प्रदर्शन कर रहे लोगों का मानना है कि चीन लगातार उनके अधिकारों का या तो हनन कर रहा है या फिर उन्‍हें खत्‍म कर रहा है। इन लोगों का मानना है कि चीन उनसे उनकी आजादी छिनने की कोशिश कर रहा है और इसके खिलाफ उठने वाली आवाज को बलपूवर्क दबाने पर तुला है। वहीं चीन हांगकांग पर प्रदर्शनकारियों की आवाज बने दूसरे मुल्‍कों को भी चुप रहने की हिदायत दे चुका है। इतना ही नहीं चीन साफ कर चुका है कि इस तरह के प्रदर्शनों को शांत करने के लिए कुछ भी करने से गुरेज नहीं करेगा। चीन सिर्फ यह बातें कह ही नहीं रहा है बल्कि इसके लिए खुद को तैयार भी कर रहा है।

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