उड़ीसा

ओडिशा में समुद्र जल को पेयजल बनाने का पहला प्लांट पारादीप में जल्द

ओडिशा में समुद्र जल को पेयजल बनाने का पहला प्लांट पारादीप में जल्द

 

भुवनेश्वर: पानी के लिए तीसरे विश्वयुद्ध की आशंकाओं के मध्य तेजी से घट रहा भूजल स्तर देश के समक्ष बड़ा संकट उत्पन्न कर रहा है। वैज्ञानिक समुद्र के खारा पानी को पीने काबिल बनाने में जुटे हैं।

केंद्र सरकार ने इस संकट से निपटने की तैयारी के लिए समुद्री जल को पीने योग्य बनाने की तकनीकी शुरुआत जिन राज्यों से की है उनमें ओडिशा भी शामिल है। पारादीप बंदरगाह में पहला दस एमएलडी प्रतिदिन यानी एक करोड़ लीटर समुद्री पानी को रोज पीने योग्य बनाने की क्षमता का अत्याधुनिक प्लांट लगाया जाना पक्का हो गया है।

समझौता पत्र पर दस्तखत हुएः इस प्लांट लगाने के लिए पारादीप पोर्ट ट्रस्ट और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी चेन्नई के बीच पारादीप में सोमवार शाम को करारा हुआ है। पारादीप बंदरगाह के मुख्य अभियंता रामचंद्र राय और ओशन टेक्नोलॉजी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर एमवी कैराना मूर्ति इस समझौता पत्र पर दस्तखत किए हैं।

आज जबकि समुद्र के किनारे महानगरों मुंबई, चैन्नई, कोलकाता, गोवा तक में भूजल समाप्त होने की स्थिति में है।समस्त समुद्र तटवर्ती इलाकों के मीठे पानी में खारे जल का विलय भी एक बड़ा खतरा बन चुका है। ओडिशा समुद्र तट की चिलिका झील का पानी खारा और थोड़ा डार्क सा है।

पारादीप में पी सकेंगे ऐसा पानीः यहां पर उल्लेखनीय है कि समुद्र जल ओस्मोसिस पानी को पारादीप शहर में मुहैया कराया जाएगा। अगले माह अगस्त 2019 के लिए इस प्लांट के लिए टेंडर जारी किए जाएंगे। यह प्लांट खासकर गर्मियों के मौसम में पीने योग्य पानी जगह-जगह पिलाने में कारगर होगा।

पारादीप पोर्ट द्वारा ओडिशा में यह पहला पेयजल प्लांट होगा जो समुद्री जल को पीने योग्य बनाकर लोगों को पानी के संकट से उबारेगा। इसकी पायलट प्लांट की लागत 116 करोड़ रुपया होगी।

एक खास बात और है भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर ने भी ब्रह्मपुर के गोपालपुर में ऐसा ही प्लांट लगाया है। बीते पांच साल से यह प्लांट काम कर रहा है। इसका उपयोग अभी तक पेयजल के लिए नहीं हो पाया। हां, कृषि के लिए यह पानी कारगर बनाया गया है।

नितिन गडकरी ने की थी पहलः देश में समुद्री पानी के अन्य उपयोगों पर तेजी से काम चल रहा है। बीते साल केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि पेयजल की मांग को पूरा करने के लिए तीन प्रमुख बंदरगाहों पारादीप, एन्नौर, चिदंबरनार में समुद्री पानी की रीसाइक्लिंग और विलवणीकरण (डेसालिनेट) के लिए प्लांट लगाएं जाएंगे। ओडिशा के पारादीप में हुए समझौता पत्र पर दस्तखत इसी कड़ी में शामिल है। समुद्र का पानी अब पीने योग्य बनाया जा सकेगा।

खारा को मीठा बनाने में इस्रायल सफलः दुनिया के वैज्ञानिक इन कोशिशों में लगे हैं कि खारे पानी को मीठा बनाने के सरल व सुविधायुक्त संयंत्र ईजाद कर लिये जाएँ। लेकिन अभी इजराइल जैसी सफलता किसी अन्य देश को नहीं मिली है।

ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर के वैज्ञानिकों के एक दल ने ग्रैफीन की एक ऐसी चलनी विकसित की है, जो समंदर के खारे पानी से नमक को अलग कर देती है। ग्रैफीन ग्रेफाइट की पतली पट्टी जैसा तत्व है, जिसे प्रयोगशाला में आसानी से तैयार किया जा सकता है।

मोदी ने किया था अवलोकनः पीएम मोदी ने तेलअवीव के डोर तट पर समुद्र के पानी को तत्काल पीने लायक बनाने वाले संयंत्र का अवलोकन किया था। यह संयंत्र ‘गेलमोबाइल वाटर फिल्ट्रेशन प्लांट’ कहलाता है। यह चलित फिल्टर प्लांट है।

नेतन्याहू इसे ‘फ्यूचर जीप’ कहते हैं। वहीं मोदी ने इसे बेजोड़ वाहन बताते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदा के वक्त यह संयंत्र बेहद उपयोगी हो सकता है। क्योंकि आधे से ज्यादा भारत बारिश में बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा में डूबा दिखाई देता है। भारत अब इस संयंत्र का निर्माण कर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भेज सकता है।

बिट्रेन ने बनायी छलनीः ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर के वैज्ञानिकों के एक दल ने ग्रैफीन की एक ऐसी छलनी विकसित की है, जो समंदर के खारे पानी से नमक को अलग कर देती है। ग्रैफीन ग्रेफाइट की पतली पट्टी जैसा तत्व है, जिसे प्रयोगशाला में आसानी से तैयार किया जा सकता है। ग्रैफीन ऑक्साइड से निर्मित यह छलनी समुद्र के पानी से नमक अलग करने में सक्षम है।

लेकिन इससे उत्पादन बहुत महंगा पड़ता है। वैज्ञानिकों के इस दल का नेतृत्व डॉ. राहुल नायर ने किया है। इस आविष्कार से सम्बन्धित शोध-पत्र को ‘साइंस जर्नल नेचर नैनोटेक्नोलॉजी’ छापा है।

रपट पड़े तो हर गंगे : 1-21 भारतीय शहरों में 2020 तक भूजल समाप्त हो जाएगा। नीती आयोग की मानें तो इनमें देश की राजधानी नईदिल्ली भी शामिल है। ऐसे में 60 करोड़ लोगों को पानी के गंभीर संकट से जूझना पड़ेगा। 2-रिपोर्ट के अनुसार 84 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को नल के जरिये पानी नहीं मिलता। 70 प्रतिशत पानी प्रदूषित है।

पानी की क्वालिटी के मामले में 122 देशों में भारत का नंबर 120वां है। 3-एक जून से 19 जून 2019 के बीच 0.3 मिमी. बारिश चैन्नई में हुई। सामान्य तौर पर यह 40 मिमी.होनी चाहिए।

वर्षा में इतनी भारी कमी खतरे के संकेत। 4-विश्वबैंक ने 45 करोड़ डॉलर पानी के लिए एक प्रोजेक्ट के लिए स्वीकृत किया है जिसके तहत भूजल के गिरते स्तर को रोकने में मदद की जाएगी। वर्ष 1950 से 2010 के बीच भारत में नलकूपों की संख्या दस लाख से बढ़कर तीन करोड़ हो गयी।

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